
डोनाल्ड ट्रंप का नया फार्मूला सुनिए- “भारत पर टैरिफ लगाओ, रूस का बटुआ हल्का हो जाएगा!” कितना सीधा है ना?
बिल्कुल वैसे जैसे – किसी और के झगड़े में पड़ोसी की बाइक puncture कर दो।
ट्रंप साहब का मानना है कि भारत रूस से जो तेल खरीदता है, उसी से पुतिन यूक्रेन में war का full tank भरते हैं।
तो अब भारत पर 50% टैरिफ फेज़-2 और फेज़-3 में लगेगा। “तेल लो, टैरिफ लो फ्री में!” – कुछ ऐसा ऑफर है।
भारत बना ग्लोबल एटीएम, अब अमेरिका टैक्स कलेक्टर!
ट्रंप का तर्क- “भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा टैरिफ लगाता है, तो अब खुद भी कुछ टैरिफ दो ना बाबा!”
इस पर एक देसी कारोबारी ने जवाब दिया:
“हम टैरिफ नहीं लगाते, हम ‘स्वदेशी भावना’ दिखाते हैं!”
(और फिर silently ट्रंप टॉवर के आगे सेल्फी ली)
फेज़ 1: 25% टैरिफ,
फेज़ 2: और 25%,
फेज़ 3: शायद भारत को ‘नो ट्रेड जोन’ घोषित कर देंगे!**
अबकी बार ट्रंप ने कहा:
“रूस से जिसने डील की, उस पर डील ब्रेकर की मुहर लगेगी।”
और भारत?
भारत बोले – “हमने तो बस पेट्रोल सस्ता किया था, तुमने तो सेंटीमेंट ही तोड़ दिया!”
ट्रंप की जवाबदेही का जवाब: “रूस पर क्यों नहीं बोले?” – “भारत पर बोला ना!”
जब ट्रंप से पूछा गया कि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने रूस पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की… तो जवाब आया –

“भारत पर टैरिफ लगाया, वही तो रूस पर सर्जिकल स्ट्राइक थी!”
वाह! ऐसे logic तो भारत में Whatsapp University भी नहीं पढ़ाती।
व्यापार संतुलन या ?
असली मुद्दा ये है –
अमेरिका को लगता है कि भारत ज्यादा सामान बेचता है, लेकिन अपने बाजार में अमेरिकन कंपनियों को घुसने नहीं देता।
अरे भैया, “Swiggy से Pizza ऑर्डर करने दो, Domino’s घर तो आएगा ही!”
भारत वाला मॉडल थोड़ा अलग है। यहां ‘मेड इन इंडिया’ तो है, लेकिन खरीदते सब ‘मेड इन चाइना’ ही हैं।
ट्रंप की टैरिफ नीति – ‘हमारा नुकसान, तुम्हारा गुनाह!’
तो ट्रंप साहब का ये नया नीति पाठ सीधा कहता है- “तुम रूस से तेल लोगे, तो हम तुमसे सब्सिडी के नाम पर टैक्स लेंगे। और फिर प्रेस कांफ्रेंस में कहेंगे –रूस की नींद उड़ा दी!”
“जब ट्रंप का मन करता है, वो टैरिफ लगा देते हैं – जैसे भारत में लोग मूड के हिसाब से चाय बना लेते हैं।”
कोई है जो इंटरनेशनल टूर पर सिर्फ ‘व्लादिमीर के पोट्टी’ को उठाने जाता है
